नई दिल्ली — WHO की ताज़ा चेतावनी अनुसार, भारत में अनुमानित 21 करोड़ से अधिक वयस्क उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) की समस्या से जूझ रहे हैं। इस संख्या से स्पष्ट है कि यह सामाजिक स्वास्थ्य संकट अब गंभीर रूप ले चुका है।
समस्या की गंभीरता
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उच्च रक्तचाप को अक्सर “मूक हत्यारा” कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती अवस्था में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते।
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यदि अनियंत्रित छोड़ा जाए, तो यह हृदयाघात, स्ट्रोक, गुर्दे की बीमारियाँ, और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
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रिपोर्ट बताती है कि उनमें से केवल कुछ ही लोग जानते हैं कि उन्हें यह समस्या है, और बहुत से लोग सही तरीके से इलाज नहीं ले पाते।
जोखिम और कारण
उच्च रक्तचाप को बढ़ाने में कई कारण जिम्मेदार हैं:
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अत्यधिक नमक का सेवन
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असंतुलित आहार, अधिक वसायुक्त भोजन
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बैठी हुई जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि की कमी
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तनाव, नींद की कमी
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मोटापा, धूम्रपान एवं शराब का सेवन
निदान एवं नियंत्रण
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नियमित रक्तचाप मापन आवश्यक है, खासकर 30 वर्ष से अधिक उम्र में।
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यदि ब्लड प्रेशर अधिक पाया जाए, तो जीवनशैली सुधार (नमक कम करना, व्यायाम, वजन नियंत्रित करना) शुरू करना चाहिए।
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डॉक्टर की सलाह पर उपयुक्त दवाओं का सेवन समय पर करना आवश्यक है।
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स्वास्थ्य विभागों एवं समुदाय स्तर पर जनजागरूकता अभियान जोर शोर से चलाने होंगे ताकि लोग समय रहते अपनी स्थिति जान सकें।
WHO की यह चेतावनी हमारी चेतना जगाती है कि उच्च रक्तचाप को संदेह न बनाकर, उसे समय रहते पहचानना और नियंत्रित करना जीवन रक्षा का मामला है।


