रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन आज मंगलवार को प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल आने के आसार हैं। सदन में आज विपक्ष का नेतृत्व कर रही कांग्रेस, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की भाजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने जा रही है। राज्य के गठन के बाद से छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में लाया जाने वाला यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि जनता और विपक्ष का इस सरकार से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।
जल जीवन मिशन से लेकर कानून-व्यवस्था तक, इन मुद्दों पर मचेगा रार
अविश्वास प्रस्ताव के अलावा आज प्रश्नकाल के दौरान भी सदन में भारी हंगामे के आसार हैं। विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन, राजधानी रायपुर की पेयजल व्यवस्था, बढ़ती औद्योगिक दुर्घटनाएं, शराब दुकानों के संचालन, सरकारी आयोजनों में हो रहे बेहिसाब खर्च और प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के खाली पड़े पदों जैसे गंभीर मुद्दों पर जवाब मांगा है। इसके अतिरिक्त नवा रायपुर के नकटी गांव में गरीबों के आशियानों पर चली बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, गहराता बिजली संकट, बढ़ी हुई बिजली दरें, खाद-बीज की किल्लत और हसदेव अरण्य में कोयला खनन के लिए हो रही वनों की कटाई का मुद्दा भी आज सदन में प्रमुखता से गूंजेगा।
संख्या बल में भाजपा भारी, इतिहास में कभी पास नहीं हुआ प्रस्ताव
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो विधानसभा में सत्ताधारी दल भाजपा के पास 54 विधायक हैं, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पास 35 सदस्य हैं और एक विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के हैं। स्पष्ट तौर पर संख्या बल भाजपा के पक्ष में है, जिससे सरकार को कोई खतरा नहीं है। वैसे छत्तीसगढ़ के संसदीय इतिहास पर नजर डालें तो अब तक आए सभी 9 अविश्वास प्रस्तावों में सरकारें अपना बहुमत साबित करने में सफल रही हैं। इससे पहले अजीत जोगी सरकार के खिलाफ दो बार, डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ पांच बार और भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं, जिन पर लंबी बहस तो हुई लेकिन वे कभी पारित नहीं हो सके।
