37.3 C
Kolkata
Saturday, June 27, 2026

गढ़वा: खरौंधी कस्तूरबा विद्यालय की सैकड़ों बच्चियां बीमार, फूड प्वाइजनिंग और भीषण गर्मी से 60 छात्राओं का इलाज जारी

गढ़वा । झारखंड के गढ़वा जिले के खरौंधी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां विद्यालय की सैकड़ों छात्राएं कथित फूड प्वाइजनिंग (दूषित भोजन) और भीषण गर्मी की वजह से अचानक बीमार हो गई हैं। दूषित भोजन खाने और टंकी का अत्यधिक गर्म पानी पीने के कारण छात्राओं की तबीयत बिगड़ी है, जिनमें से 60 बच्चियों को गंभीर हालत में भवनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में भर्ती कराया गया है। 20 से अधिक छात्राओं की हालत नाजुक बताई जा रही है।

हॉस्टल प्रबंधन की भारी लापरवाही, गार्ड के भरोसे था परिसर

इस पूरे घटनाक्रम में विद्यालय प्रबंधन की बेहद गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। बताया जा रहा है कि जब यह घटना घटी, उस समय हॉस्टल में न तो वॉर्डन मौजूद थीं और न ही कोई अन्य जिम्मेदार पदाधिकारी। पूरा परिसर सिर्फ एक सुरक्षा गार्ड के भरोसे छोड़ दिया गया था। गुरुवार शाम से ही बच्चियों की तबीयत बिगड़ने लगी थी, लेकिन प्रबंधन मामले को दबाने और छिपाने का प्रयास करता रहा।

परिजनों का हंगामा, पुलिस और अधिकारियों के हस्तक्षेप पर खुला गेट

घटना की भनक लगते ही जब डरे-सहमे अभिभावक और ग्रामीण देर रात विद्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंचे, तो गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और घंटों बाहर खड़ा रखा। इसके बाद परिजनों ने गेट पर ही जमकर हंगामा और विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामले की सूचना मिलते ही भवनाथपुर के बीडीओ नंद जी राम, अंचलाधिकारी (CO) शंभू राम और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद विद्यालय का दरवाजा खुलवाया गया और आनन-फानन में रात करीब 9 बजे एम्बुलेंस व अन्य वाहनों से बच्चियों को अस्पताल भिजवाया गया।

छात्राओं की आपबीती: जेनरेटर होने पर भी नहीं चलाया गया मोटर

अस्पताल में भर्ती पीड़ित छात्राओं ने हॉस्टल प्रशासन पर प्रताड़ना और लापरवाही के सीधे आरोप लगाए हैं। छात्राओं के अनुसार, दोपहर के भोजन में उन्हें ‘पुआ’ और चावल दिया गया था, जो संभवतः दूषित था। इसके अलावा, क्षेत्र में बिजली गुल होने और भीषण गर्मी के कारण छत पर रखी प्लास्टिक की टंकी का पानी खौल रहा था, जिसे पीने के लिए वे मजबूर थीं। शाम के नाश्ते के बाद भी उन्हें पीने का साफ पानी नहीं दिया गया। छात्राओं का आरोप है कि परिसर में जेनरेटर की व्यवस्था होने के बावजूद पानी भरने के लिए मोटर नहीं चलाई गई।

स्वास्थ्य विभाग मुस्तैद, स्थिति नियंत्रण में

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। गढ़वा के सिविल सर्जन जॉन एफ कैनेडी ने बताया कि साठ बच्चियों का इलाज रातभर चला है और फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। वहीं, भवनाथपुर पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने पुष्टि की कि प्रथम दृष्टया यह मामला फूड प्वाइजनिंग और भीषण गर्मी में गर्म पानी पीने का ही है। सभी पीड़ित छात्राओं को आपातकालीन चिकित्सा वार्ड में रखकर दवाइयां और स्लाइन (ग्लूकोज) चढ़ाई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी और डॉक्टरों की टीम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

Related Articles

नवीनतम लेख