काठमांडू। नेपाल की प्रतिनिधि सभा (संसद) में विपक्षी दलों का गतिरोध भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के एक विवादास्पद बयान पर बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा सीमा विवाद को लेकर दिए गए बयान पर विपक्ष ने गंभीर आपत्ति जताते हुए मोर्चा खोल दिया है। बालेन्द्र शाह ने अपने बयान में कहा था कि “नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है।” विपक्षी दलों ने अब इस बयान के पीछे की मंशा और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) के रुख पर कड़े सवाल उठाए हैं।
दस दिन बाद भी पीएम ने नहीं दी सफाई, माफी की मांग पर अड़ा विपक्ष
विवाद की शुरुआत बीते 31 मई को प्रतिनिधि सभा की बैठक के दौरान हुई थी। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि इस बेहद संवेदनशील बयान को दिए दस दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन प्रधानमंत्री ने न तो इस पर कोई स्पष्टीकरण दिया है, न ही बयान वापस लिया है और न ही संसद में आकर माफी मांगी है। सीपीएन-यूएमएल, नेपाली कांग्रेस, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) सहित प्रमुख विपक्षी दलों ने सरकार पर नेपाल की संप्रभुता और राष्ट्रीय अखंडता से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।
राष्ट्रवाद और देश की गरिमा से जुड़ा मामला, चुप्पी से जनता आहत
आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने के साथ हुई चर्चा के दौरान नेपाली कांग्रेस संसदीय दल के नेता भीष्मराज आङ्देम्बे ने कहा कि प्रधानमंत्री की इस रहस्यमयी चुप्पी से नेपाली जनता की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कोई सामान्य विषय नहीं है, बल्कि राष्ट्रवाद और देश की गरिमा से जुड़ा सीधा मामला है। यदि सरकार इस बयान पर तुरंत स्पष्टीकरण देने से बचती रही, तो उसकी मंशा पर बड़े सवाल खड़े रहेंगे।
विपक्ष का सवाल- नेपाल ने भारत की किस जमीन पर किया कब्जा?
सीपीएन-यूएमएल के मुख्य सचेतक ऐन महर ने भी तीखी चिंता व्यक्त करते हुए सवाल किया कि प्रधानमंत्री आखिर संसद में यह बताएं कि नेपाल ने भारत के किस क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है? कोई प्रधानमंत्री ऐसा गैर-जिम्मेदाराना बयान देकर माफी मांगने से कैसे मुकर सकता है? महर ने कहा कि इस बयान को भारतीय मीडिया में व्यापक रूप से दिखाया गया, जिसके तुरंत बाद वरिष्ठ सरकारी नेताओं की भारत यात्राएं भी हुईं, लेकिन सीमा विवादों पर कोई प्रभावी कूटनीतिक पहल नहीं दिखी। इससे विपक्ष का संदेह और ज्यादा गहरा गया है।
कालापानी और लिपुलेख विवाद के बीच बयान असहनीय: कम्युनिस्ट पार्टी
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य सचेतक युवराज दुलाल ने प्रधानमंत्री के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि नेपाल ने कभी किसी भी पड़ोसी देश की भूमि पर अतिक्रमण नहीं किया है। उन्होंने याद दिलाया कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी से जुड़े सीमा विवाद आज भी दोनों देशों के बीच अनसुलझे हैं। ऐसे समय में इन संवेदनशील मुद्दों के कूटनीतिक समाधान की दिशा में काम करने के बजाय प्रधानमंत्री का यह कहना कि नेपाल ने भारतीय भूमि पर कब्जा किया है, जनता के गले नहीं उतर रहा है।
लिखित स्पष्टीकरण देने पर भी विचार करने को तैयार विपक्षी दल
सरकार पर भारत के प्रति अत्यधिक नरम रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए आरपीपी सांसद खुशबु ओली ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने देश की संप्रभुता के लिए बड़े त्याग किए हैं, इसे मामूली विषय कहकर टाला नहीं जा सकता। फिलहाल विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि यदि प्रधानमंत्री खुद संसद में उपस्थित होकर जवाब नहीं दे सकते, तो कम से कम उनका लिखित स्पष्टीकरण विदेश मंत्री या मंत्रिपरिषद के किसी अन्य सदस्य के माध्यम से सदन के पटल पर पढ़ा जाना चाहिए, जिसे विपक्ष स्वीकार करने को तैयार है।
