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Wednesday, May 6, 2026

भारत-वियतनाम संबंधों का नया अध्याय: ‘साथ चलेंगे, साथ बढ़ेंगे और साथ जीतेंगे’ – प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को भारत और वियतनाम के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए कहा कि दोनों देश अब ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के एक ऐतिहासिक चरण में प्रवेश कर चुके हैं। वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता के पश्चात प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि दोनों राष्ट्र विकास और समृद्धि के पथ पर परस्पर सहयोग के साथ आगे बढ़ेंगे।

आर्थिक लक्ष्य: 2030 तक 25 अरब डॉलर का व्यापार प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापारिक संबंधों की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 16 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। अब इसे वर्ष 2030 तक 25 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

  • कृषि और खाद्य: दोनों देशों के बीच कृषि उत्पादों के आदान-प्रदान पर सहमति बनी है। जल्द ही भारत के अंगूर और अनार वियतनाम के बाजारों में उपलब्ध होंगे, जबकि भारतीय उपभोक्ता वियतनाम के डूरियन और पोमेलो फलों का आनंद ले सकेंगे।

  • डिजिटल भुगतान: वित्तीय क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हुए भारत के ‘यूपीआई’ और वियतनाम के ‘फास्ट पेमेंट सिस्टम’ को जोड़ने का निर्णय लिया गया है।

रक्षा और रणनीतिक सहयोग प्रधानमंत्री ने वियतनाम को भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और ‘महासागर विजन’ का मुख्य स्तंभ बताया। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने का संकल्प लिया। भारत, वियतनाम के माध्यम से आसियान देशों के साथ अपने संबंधों को और विस्तार देगा।

सांस्कृतिक विरासत और आतंकवाद पर प्रहार वार्ता के दौरान सभ्यतागत संबंधों पर भी चर्चा हुई, जिसमें चम्पा सभ्यता के मंदिरों के संरक्षण और प्राचीन पांडुलिपियों के अंकीकरण (डिजिटलीकरण) जैसे कार्यों को आगे बढ़ाने पर बल दिया गया। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के विरुद्ध भारत का समर्थन करने और पहलगाम आतंकी हमले की भर्त्सना करने के लिए वियतनाम का आभार प्रकट किया।

साझा प्रगति का मार्ग वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और वियतनाम तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं। उन्होंने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए अंत में कहा कि एक-दूसरे के विकास में सहभागी बनना ही दोनों देशों की प्रगति का वास्तविक मार्ग है। “हम साथ चलेंगे, साथ बढ़ेंगे और साथ जीतेंगे” के उद्घोष के साथ इस शिखर वार्ता का समापन हुआ।

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