तिरुवनंतपुरम | ‘गॉड्स ओन कंट्री’ कहे जाने वाले केरल में इस बार बड़ा सियासी उलटफेर होता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों ने लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को बड़ा झटका दिया है। राज्य की 140 सीटों पर हो रही मतगणना में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ (UDF) बहुमत के जादुई आंकड़े के करीब पहुंच गया है।
मुख्यमंत्री विजयन की सीट पर भी संकट
सबसे चौंकाने वाला रुझान धर्मादम विधानसभा सीट से सामने आ रहा है, जहाँ मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अपने प्रतिद्वंद्वी से पिछड़ गए हैं।
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लेफ्ट का पतन: पिछले चुनाव में इतिहास रचने वाली एलडीएफ इस बार अपनी पकड़ खोती नजर आ रही है।
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यूडीएफ की लहर: कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने शुरुआती राउंड से ही बढ़त बना ली है। वायनाड से लेकर तिरुवनंतपुरम तक यूडीएफ कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है।
वोटिंग रिकॉर्ड और जनता का मूड
9 अप्रैल को हुए मतदान में केरल की जनता ने 78.27% वोटिंग कर अपना फैसला सुरक्षित किया था।
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मुद्दे: राज्य में भ्रष्टाचार के आरोप, बेरोजगारी और शासन विरोधी लहर (Anti-incumbency) कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित होती दिख रही है।
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बीजेपी की स्थिति: राज्य में अपना खाता खोलने और सीटों की संख्या बढ़ाने की कोशिश में जुटी बीजेपी भी कुछ शहरी क्षेत्रों में कड़ी टक्कर दे रही है।
तमिलनाडु और पुडुचेरी का हाल
पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में जहाँ थलपति विजय की पार्टी TVK ने धमाका किया है और मुख्यमंत्री स्टालिन पीछे चल रहे हैं, वहीं पुडुचेरी में एन. रंगास्वामी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन अपनी सत्ता बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
केरल के ये रुझान यदि अंतिम नतीजों में बदलते हैं, तो यह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के लिए देश के आखिरी मजबूत गढ़ में एक बड़ी हार होगी।

