काठमांडू | नेपाल की राजधानी में नदियों के किनारे और सरकारी जमीनों पर बसी अवैध बस्तियों को हटाने की चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य नागरिकों को बेघर करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और व्यवस्थित आवास प्रदान करना है।
भ्रम और डर फैलाने की कोशिश: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से भूमिहीन नागरिकों के बीच डर का माहौल बना रहे हैं। उन्होंने अपील की है कि नागरिक किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी या अफवाहों पर ध्यान न दें।
कानूनी बाधाएं की गईं दूर
पीएम बालेन्द्र ने जानकारी दी कि भूमिहीन समस्या के स्थायी समाधान के लिए 2021 के भूमि संबंधी कानूनों में जो अड़चनें थीं, उन्हें सरकार ने अध्यादेश के जरिए हटा दिया है। अब सरकार के पास वास्तविक जरूरतमंदों की मदद के लिए स्पष्ट कानूनी रास्ता है।
समाधान के लिए सरकार का रोडमैप:
डिजिटल डेटा संग्रह: वास्तविक भूमिहीन नागरिकों की पहचान के लिए डिजिटल सत्यापन और अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
पारदर्शी सत्यापन: डेटा के आधार पर यह तय किया जाएगा कि कौन वास्तव में भूमिहीन है, ताकि समाधान पारदर्शी हो सके।
सुरक्षित स्थानांतरण: जो लोग जोखिम भरे या असुरक्षित भौगोलिक क्षेत्रों में रह रहे हैं, उन्हें सरकार सुरक्षित और व्यवस्थित स्थानों पर शिफ्ट करेगी।
आयोग की भूमिका: अन्य भूमिहीनों के लिए संबंधित आयोग की सिफारिशों के आधार पर निर्णय लिए जाएंगे।
सम्मानजनक आवास की प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि बस्ती प्रबंधन की प्रक्रिया में किसी के साथ भी अन्याय नहीं होगा। उन्होंने कहा, “सरकार के कदम लोगों को हटाने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और स्थायी आवास सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे हैं।”

