33 C
Kolkata
Saturday, April 25, 2026

हाथी के हमले से मां-बेटी की मौत, दो बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल

सरायकेला । सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल अंतर्गत ईचागढ़ प्रखंड के हाड़ात गांव में शनिवार तड़के जंगली हाथी के हमले से सनसनी फैल गई। रात करीब तीन बजे गांव में घुसे एक जंगली हाथी ने एक परिवार पर हमला कर दिया, जिसमें मां और बेटी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि परिवार के दो बुजुर्ग सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

ग्रामीणों के अनुसार, हाथी अचानक गांव में घुस आया और सीधे मोहनलाल महतो के घर को निशाना बनाया। रात के सन्नाटे में हुए इस हमले से परिवार को संभलने तक का मौका नहीं मिला। हाथी ने घर में घुसकर जमकर उत्पात मचाया और वहां मौजूद लोगों को कुचल दिया।

हाथी के इस हमले में 35 वर्षीय चाइना देवी और उनकी 13 वर्षीय पुत्री अमिता की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। दोनों को हाथी ने बुरी तरह कुचल दिया था।

मां-बेटी की मौत की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।

वहीं, परिवार के मुखिया 72 वर्षीय मोहनलाल महतो और 70 वर्षीय सांतुला देवी भी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम में प्रभारी वनपाल मुकेश महतो, राणा प्रताप, सनातन रेबानी, वन रक्षी मुन्ना सोरेन और कैलाश चंद्र महतो शामिल थे। स्थानीय पुलिस भी गांव पहुंची और हालात को नियंत्रित करने में जुट गई।

वन विभाग ने त्वरित राहत के तौर पर मृतकों के परिजनों को 50-50 हजार रुपये की नगद सहायता प्रदान की है। अधिकारियों ने बताया कि आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्येक मृतक के परिजनों को 3 लाख 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया है। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीण रात के समय घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं और हाथी के दोबारा लौटने की आशंका से भयभीत हैं।

वन विभाग ने हाथी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष निगरानी शुरू कर दी है। साथ ही ग्रामीणों को सतर्क रहने, रात में अकेले बाहर न निकलने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

लगातार बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।

Related Articles

नवीनतम लेख