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Wednesday, April 1, 2026

चैत्र पूर्णिमा पर तामांग समुदाय ने पूर्वजों को किया याद, उमड़ा आस्था का जनसैलाब

काठमांडू। चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर काठमांडू के बौद्ध क्षेत्र में तामांग समुदाय ने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से जुड़ा ‘तेमाल जात्रा’ श्रद्धापूर्वक मनाया। हर वर्ष चैत्र पूर्णिमा के दिन काठमांडू के बौद्ध, स्वयम्भू और नमोबुद्ध क्षेत्रों में मनाया जाने वाला यह पर्व तामांग समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है।

परंपरा के अनुसार इस जात्रा की शुरुआत तेमाल क्षेत्र से मानी जाती है। इस अवसर पर दिवंगत परिजनों की आत्मा की शांति के लिए दीप जलाने और पूजा-पाठ करने की परंपरा रही है। इसी परंपरा के तहत चैत्र पूर्णिमा के दिन बौद्ध में पूजा करने के बाद श्रद्धालु बालाजु बाइसधारा में स्नान करने जाते हैं और फिर स्वयम्भू पहुंचकर दीप जलाकर अस्थि विसर्जन करते हैं। जात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने बौद्ध स्तूप परिसर में ‘छ्योमि’ (दीप) जलाने के साथ ही मृतकों के नाम पर ‘ङो’ पूजा भी की। लामा गुरुओं के नेतृत्व में विशेष ‘ङोवा मोन्लम’ पूजा भी संपन्न की गई।

मान्यता है कि इस प्रकार पूजा करने से मृतक की आत्मा को शांति मिलती है और उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। यह जात्रा चैत्र शुक्ल चतुर्दशी की शाम से शुरू होती है, जिसमें मकवानपुर, ललितपुर, नुवाकोट, सिन्धुपाल्चोक और काभ्रेपलान्चोक सहित देश के विभिन्न जिलों से तामांग समुदाय के लोग बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। पूर्णिमा की सुबह बालाजु बाइसधारा में स्नान और स्वयम्भू में पूजा-अर्चना के बाद इस जात्रा का समापन करने की परंपरा है।

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