रांची | झारखंड में सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पड़ोसी राज्य असम के विधानसभा चुनाव में अकेले उतरने का फैसला किया है। सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के साथ सहमति नहीं बन पाने के बाद पार्टी ने असम की 21 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं। सोमवार को पार्टी के सभी 21 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया।
कांग्रेस और भाजपा दोनों के खिलाफ मोर्चा
रांची के हरमू स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने पार्टी के रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि असम में झामुमो का मुकाबला कांग्रेस और भाजपा दोनों से होगा।
गठबंधन पर बयान: सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, “गठबंधन पर बात नहीं बनी, इसलिए हम अकेले चुनाव लड़ रहे हैं। इससे किसका नुकसान होगा यह तो वक्त बताएगा, लेकिन हमें यकीन है कि झामुमो को वहां लाभ होगा।”
झारखंड में गठबंधन बरकरार: उन्होंने यह भी साफ किया कि असम की स्थिति का असर झारखंड पर नहीं पड़ेगा। झारखंड में कांग्रेस के साथ उनका चुनाव पूर्व गठबंधन है और यह अगले चुनाव तक मजबूती से जारी रहेगा।
केंद्र की विदेश नीति पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान झामुमो प्रवक्ता ने वैश्विक संकट और केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री के संबोधन पर भी निशाना साधा। उन्होंने मांग की कि सरकार इस मुद्दे पर श्वेत पत्र जारी करे।
उन्होंने दावा किया कि मध्य पूर्व (Middle East) के कई हिस्सों में अब भी भारतीय फंसे हुए हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। उन्होंने आगाह किया कि यदि वैश्विक हालात एक महीने तक ऐसे ही रहे, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ना तय है।
चुनाव की तैयारी पूरी
झामुमो ने असम में उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है जहाँ झारखंडी मूल के लोगों और चाय बागान श्रमिकों की संख्या अधिक है। पार्टी को उम्मीद है कि वह अपनी क्षेत्रीय पहचान और जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर वहां बेहतर प्रदर्शन करेगी।


