रांची | पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध का असर अब झारखंड की रसोई और उद्योगों पर दिखने लगा है। राजधानी रांची में एलपीजी गैस की भारी किल्लत के बीच जिला प्रशासन ने झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ अहम बैठक की। रांची के उपायुक्त (DC) मंजूनाथ भजंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण यह संकट फिलहाल दूर होने वाला नहीं है।
“पेट्रोल-डीजल की भी हो सकती है कमी”
बैठक के दौरान उपायुक्त ने भविष्य के खतरों के प्रति आगाह करते हुए कहा, एलपीजी के बाद अब पेट्रोल और डीजल की किल्लत होने की भी आशंका है। व्यवसायियों और आम जनता को अब वैकल्पिक ईंधन (जैसे सौर ऊर्जा या बिजली) की ओर रुख करना चाहिए। शहर में गैस की कालाबाजारी करने वालों पर जिला प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा और दोषियों को जेल भेजा जाएगा।
उद्योगों पर ताला लगने की नौबत
झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के बैनर तले जुटे व्यवसायियों ने अपनी व्यथा सुनाई। ब्रेड व्यवसायी दिनेश कुमार ने चेतावनी दी कि यदि एक हफ्ते में स्थिति नहीं सुधरी, तो उन्हें अपना कारोबार बंद करना पड़ेगा। गैस की कमी के कारण उत्पादन ठप हो रहा है, जिससे न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है बल्कि बेरोजगारी बढ़ने का भी खतरा पैदा हो गया है।
व्यवसायियों की प्रमुख मांगें:
कालाबाजारी पर रोक: गैस एजेंसियों की मनमानी और अवैध बिक्री पर लगाम लगाई जाए।
होम डिलीवरी: लंबी लाइनों से बचने के लिए गैस की होम डिलीवरी सुनिश्चित की जाए।
PNG की सुविधा: शहर में जल्द से जल्द पाइप नेचुरल गैस (PNG) की पाइपलाइन बिछाई जाए।
कोयला डिपो: गैस के विकल्प के रूप में शहर में सीमित मात्रा में कोयला उपलब्ध कराने के लिए डिपो खोले जाएं।
सरकार की पहल
एमएसएमई (MSME) के सहायक निदेशक गौरव कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। जल्द ही व्यवसायियों की सहायता के लिए एक टॉल फ्री नंबर और ईमेल आईडी जारी की जाएगी। चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि इस वैश्विक संकट के समय में धैर्य और समन्वय ही सबसे बड़ा समाधान है।


