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Thursday, February 19, 2026

बिहार विधानसभा में उठा प्रवासी मजदूरों के पार्थिव शरीर को घर पहुंचाने का मुद्दा

पटना। बिहार विधानसभा में असंगठित क्षेत्र के प्रवासी मजदूरों से जुड़ा मुद्दा उठाया गया। सदस्य अख्तरूल इमाम ने दुर्घटना या स्वाभाविक मृत्यु की स्थिति में प्रवासी मजदूरों के पार्थिव शरीर को उनके परिवार तक पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। सदन में उन्होंने कहा कि बिहार के लगभग 70 प्रतिशत परिवार किसी न किसी रूप में प्रवासी मजदूरों पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि किसी प्रवासी मजदूर की राज्य के बाहर या विदेश में स्वाभाविक मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिजनों को पार्थिव शरीर लाने में भारी आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि स्वाभाविक मृत्यु के मामलों में भी सरकार पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक घर पहुंचाने की जिम्मेदारी ले।

इस पर जवाब देते हुए श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग तथा युवा रोजगार एवं कौशल विभाग के मंत्री संजय सिंह टाइगर ने कहा कि वर्तमान प्रावधानों के तहत राज्य के बाहर अथवा विदेश में कार्यरत असंगठित क्षेत्र के प्रवासी श्रमिकों की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उनके पार्थिव शरीर को ससम्मान उनके घर तक पहुंचाने का दायित्व सरकार उठाती है।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वाभाविक मृत्यु की स्थिति में, चाहे वह राज्य के भीतर हो या बाहर, पार्थिव शरीर को घर पहुंचाने का कोई अलग से प्रावधान फिलहाल लागू नहीं है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सदस्य द्वारा दिए गए सुझाव पर विभागीय स्तर पर विचार किया जाएगा।

चर्चा के दौरान सदस्य कुमार सर्वजीत ने यह भी प्रश्न उठाया कि अब तक कितने मजदूरों को इस योजना का लाभ मिला है। इसके उत्तर में मंत्री संजय सिंह टाइगर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक इस मद में 2,58,547 रुपये व्यय किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के पास प्रवासी मजदूरों से संबंधित आंकड़े उपलब्ध हैं और आवश्यकता अनुसार सहायता प्रदान की जा रही है।

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