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Thursday, February 19, 2026

लिव इन रिलेशन संस्कृति भारतीय सभ्यता के विपरीत : सुनील आनंद

पूर्वी सिंहभूम। आनंद मार्ग प्रचारक संघ के प्रचारक सुनील आनंद ने कहा है कि लिव-इन रिलेशन की बढ़ती प्रवृत्ति भारतीय समाज और पारंपरिक विवाह व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि समाज को इस दिशा में सजग करने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर जागरूकता आवश्यक है। इसी उद्देश्य से संघ की ओर से पूर्वी सिंहभूम जिले के शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

संघ के कार्यकर्ता स्कूलों के बाहर अभिभावकों के बीच संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों में भारतीय सभ्यता, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों पर चर्चा की जा रही है। सुनील आनंद ने कहा कि परिवार भारतीय समाज की मूल इकाई है और विवाह संस्था इसकी आधारशिला है। उनके अनुसार, विवाह केवल सामाजिक अनुबंध नहीं बल्कि एक संस्कार है, जो समाज को स्थिरता और संतुलन प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि लिव-इन संबंधों में महिलाओं के शोषण की आशंका अधिक रहती है और कई मामलों में युवतियां मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावित होती हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के साथ संवाद बढ़ाएं और उन्हें भारतीय परंपराओं व नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करें। सुनील आनंद का कहना था कि आधुनिकता को अपनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन यदि उससे सामाजिक ताना-बाना प्रभावित होता है तो उस पर गंभीर विचार होना चाहिए।

इस दौरान उन्होंने झारखंड में डायन प्रथा से जुड़ी घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी रूप में महिला उत्पीड़न समाज के लिए घातक है और ऐसी कुप्रथाओं के खिलाफ सामाजिक जागरूकता बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।

धार्मिक संदर्भ देते हुए सुनील आनंद ने भगवान शिव का उल्लेख किया और कहा कि शिव-पार्वती का विवाह आदर्श दांपत्य जीवन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विवाह प्रथा ने महिलाओं को सामाजिक सम्मान और सुरक्षा प्रदान की तथा एक व्यवस्थित समाज की नींव रखी। उनका मानना है कि जिस समाज में महिलाओं का सम्मान नहीं होता, उसका पतन निश्चित है।

संघ की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान में युवाओं और अभिभावकों को पारिवारिक मूल्यों के महत्व के बारे में बताया जा रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संवाद और शिक्षा के माध्यम से ही सामाजिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है। अभियान के तहत विभिन्न मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे समूहों में बैठकें की जा रही हैं, जहां लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया जा रहा है।

सुनील आनंद ने कहा कि समाज में बदलती जीवनशैली के बीच आवश्यक है कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं की मूल भावना को समझा जाए। उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे महिलाओं के सम्मान, परिवार की मजबूती और सामाजिक समरसता के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

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