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Tuesday, March 3, 2026

विद्युत मंत्रालय ने राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 के मसौदे पर हितधारकों से मांगे सुझाव

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को हितधारकों के साथ सार्वजनिक परामर्श के लिए नई “राष्ट्रीय विद्युत नीति (एनईपी) 2026” का मसौदा जारी किया, जो भारत के पावर सेक्टर को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विद्युत मंत्रालय ने जारी एक बयान में बताया कि सरकार ने नई “राष्ट्रीय विद्युत नीति (एनईपी) 2026” का मसौदा जारी कर दी है। इस मसौदा ‘‘एनईपी 2026’’ का उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए विद्युत क्षेत्र में परिवर्तन लाना है। इसको अंतिम रूप दिए जाने के बाद, यह नीति 2005 में अधिसूचित वर्तमान एनईपी का स्थान लेगी।
मंत्रालय ने जारी राष्ट्रीय विद्युत नीति (एनईपी) 2026 के मसौदे पर हितधारकों से सुझाव मांगे। मंत्रालय ने कहा कि मसौदे में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के नुकसान व कर्ज, लागत-अनुरूप न होने वाली दरों तथा अधिक ‘क्रॉस-सब्सिडी’ जैसी समस्याओं से निपटने पर जोर दिया गया है। हितधारक अपनी टिप्पणियां 30 दिन के भीतर प्रस्तुत कर सकते हैं।
विद्युत मंत्रालय ने बताया कि मसौदा नीति का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, परिवर्तनीय नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी को समाहित करने के लिए ग्रिड की मजबूती सुनिश्चित करना और मांग-पक्षीय उपायों के साथ उपभोक्ता-केंद्रित सेवाएं प्रदान करना है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘2005 के बाद कई उपलब्धियों के बावजूद बिजली क्षेत्र, विशेषकर वितरण खंड में चुनौतियां बनी हुई हैं। उच्च नुकसान और बकाया कर्ज जैसी समस्याएं कायम हैं। कई क्षेत्रों में दरें अब भी लागत-अनुरूप नहीं हैं और अधिक ‘क्रॉस-सब्सिडी’ के कारण औद्योगिक दरें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती है।
इस पृष्ठभूमि में एनईपी 2026 ने महत्वाकांक्षी लेकिन आवश्यक लक्ष्य तय किए हैं। इस नीति के तहत 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत 2,000 यूनिट (किलोवाट-घंटा) और 2047 तक 4,000 यूनिट से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। यह नीति भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप भी है, जिनमें 2030 तक 2005 के स्तर से उत्सर्जन तीव्रता में 45 प्रतिशत की कमी और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करना शामिल है। इसके लिए कम-कार्बन ऊर्जा मार्गों की ओर निर्णायक बदलाव आवश्यक है।
एनईपी 2026 में इन चुनौतियों से निपटने और लक्ष्यों को हासिल करने की रणनीतियां बताई गई हैं। नीति में साइबर सुरक्षा, प्रौद्योगिकी अपनाने और कौशल विकास पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा, भंडारण के एकीकरण और पुरानी इकाइयों के पुनःउपयोग के जरिये ग्रिड समर्थन बढ़ाने का भी प्रस्ताव है ताकि नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक एकीकरण संभव हो सके।

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