झारखंड में कुड़मी समाज ने खुद को आदिवासी का दर्जा दिए जाने की अपनी पुरानी मांग को लेकर रेल रोको आंदोलन आज से शुरू कर दिया है। कुड़मी समाज अपने लिए आदिवासी का दर्जा मांग रहा है। इस मांग के समर्थन में एक बार फिर कुड़मी समाज के लोगों ने आंदोलन तेज कर दिया है।
आदिवासी कुड़मी समाज मंच के आह्वान पर शनिवार सुबह से ही राज्य के कई जिलों में कुड़मी समाज के लोग रेलवे ट्रैक पर उतर आए और रेल परिचालन को पूरी तरह ठप कर दिया। लोगों ने रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया है। दुर्गा पूजा से ठीक पहले शुरू हुए इस आंदोलन से लोग परेशान हैं।
पूर्व रेलवे और दक्षिण पूर्व रेलवे की 69 ट्रेनें प्रभावित हुईं हैं। इसमें 22 ट्रेनों को रद्द किया गया है, 13 ट्रेनों को डायवर्ट, 17 ट्रेनों का आंशिक समापन और आंशिक प्रारंभ किया गया है, तो 17 ट्रेनों को अन्य स्टेशनों से चलाया जा रहा है।
आदिवासी कुड़मी समाज मंच के आह्वान पर आंदोलनकारी लगातार रेलवे ट्रैकों की तरफ बढ़ रहे हैं। कहीं-कहीं पर तो सुबह 4:00 बजे से ही स्टेशनों पर कब्जा कर लिया गया है। बोकारो, रांची, गिरिडीह के छोटे स्टेशनों पर भारी संख्या में आंदोलनकारियों के द्वारा रेल ट्रैक पर कब्जा कर लिया गया है।
कई स्टेशन पर तो भीड़ बीच ट्रैक पर जाकर बैठ गई है। हालांकि तमाम कुर्मी बहुल इलाकों में देर रात तक पुलिस आंदोलनकारियों को नजदीकी रेलवे स्टेशनों पर जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग करती रही। लेकिन इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला है।
कुर्मी समाज की यह मांग नई नहीं है। इससे पहले भी 2022 और 2023 में ऐसे आंदोलनों के दौरान रेलवे को प्रतिदिन ₹21 करोड़ का नुकसान हुआ था। कोलकाता में 29 सितंबर 2023 को हुए हिंसक प्रदर्शन में सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचा था। कैलकत्ता हाई कोर्ट ने 2023 में आदेश दिया था कि कुर्मी समाज को सार्वजनिक जीवन में व्यवधान डालने का अधिकार नहीं है, और राज्य सरकार को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया था


