सुकमा। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में मंगलवार को 22 सक्रिय माओवादियों ने शासन की पुनर्वास और आत्मसमर्पण नीति के तहत आत्मसमर्पण किया। यह जानकारी एडिशनल एसपी नक्सल ऑपरेशन रोहित शाह ने दी। सभी माओवादियों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया। इसमें एक महिला माओवादी भी शामिल थी, जो लंबे समय से संगठन से जुड़ी हुई थी।
एडिशनल एसपी रोहित शाह ने बताया कि नक्सल मुक्त अभियान बस्तर के तहत जिले में लगातार नक्सल विरोधी अभियान संचालित किए जा रहे हैं। विकासात्मक कार्य सुदूर वनांचल क्षेत्र में पहुंचाए जा रहे हैं, और छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सुकमा पुलिस द्वारा ‘पूना मारगेम’ पुनर्वास अभियान चलाया जा रहा है। अति संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार पुलिस कैम्प स्थापित होने से माओवादी संगठन कमजोर पड़ रहा है।आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई, इसके अलावा शासन की अन्य योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया जाएगा।
आत्मसमर्पण करने वालों में प्रमुख माओवादियों के नाम हैं:
गोंचे हुंगा (मिलिशिया कमांडर), बण्डी (मिलिशिया सदस्य), माड़वी हांदा, हिडमा मड़कम नन्दा (मिलिशिया सदस्य), मड़कम रामा, मड़कम सोमड़ा, मिडियाम आयता, मड़कम चैतु, माड़वी हुंगा, लक्ष्मी मुचाकी, गोंचे उर्फ मड़कम हुंगा, माड़वी दूला, कुंजाम केसा, वेको विज्जा, वेको हड़मा, मुचाकी सुक्का, माड़वी जोगा, मड़कम पाण्डू, नुप्पो देवा, भोगाम दसरू उर्फ सोना, सलवम लखमा, जगत उर्फ मुचाकी भीमा।
रोहित शाह ने बताया कि जिले में सक्रिय माओवादी संगठन अब कमजोर हो रहे हैं और आत्मसमर्पण अभियान से नक्सलियों को मुख्यधारा में जोड़ने और क्षेत्र में शांति बहाल करने में मदद मिलेगी।


