बक्सर। बक्सर सहित पूरे बिहार में फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) की कमी के कारण सहकारी समितियों में धान खरीद व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। कई जिलों में पैक्स और सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की तौल और खरीद रोक दी गई है, जिससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर स्थिति को लेकर बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने बुधवार को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
सांसद ने पत्र में बताया कि एफआरके का स्टॉक समाप्त होते ही धान खरीद पूरी तरह ठप हो गई। किसान अपनी उपज लेकर वापस लौटने को मजबूर हैं, जिससे उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है। खरीद रुकने से किसानों पर कर्ज चुकाने, घरेलू खर्च और अगली फसल की तैयारी का अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
पत्र में इसे प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी का परिणाम बताया गया है। केंद्र सरकार ने खाद्यान्न फोर्टिफिकेशन नीति के तहत एफआरके को अनिवार्य किया, लेकिन समय पर इसकी आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो सकी। वहीं राज्य सरकार भी पूरे खरीद सत्र में एफआरके की उपलब्धता बनाए रखने में असफल रही।
सांसद ने उल्लेख किया कि 3 फरवरी को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के सचिव से बातचीत में 15 फरवरी तक एफआरके उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला था, लेकिन किसानों को हुए नुकसान की भरपाई को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं बनी है। उन्होंने बताया कि बिहार में इस वर्ष धान खरीद का लक्ष्य 36.85 लाख टन था, जबकि अब तक केवल 18.76 लाख टन की ही खरीद हो सकी है। सांसद ने प्रधानमंत्री से तत्काल एफआरके आपूर्ति और किसानों के हित में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञात हो कि एक किलो एफ आर के एक क्विंटल चावल में कुटाई के समय मिलाकर राज्य खाद्य निगम को आपूर्ति की जानी है। एफ आर के मल्टी विटामिन युक्त पोषक तत्व से भरपूर चावल होता है।


