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Friday, July 3, 2026

जापानी कंपनियों का ओडिशा में ₹67 हजार करोड़ निवेश, 7 हजार रोजगार के अवसर

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने जापान के साथ आर्थिक साझेदारी को मजबूत करते हुए जापान की आईएचआई कॉर्पोरेशन और एसीएमई ग्रुप के साथ 67 हजार करोड़ रुपये के निवेश संबंधी महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस निवेश से राज्य में हरित ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने के साथ करीब 7 हजार प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

राज्य सरकार द्वारा आयोजित ‘इंटरैक्शन विद जापानी बिजनेस डेलीगेट्स’ कार्यक्रम के दौरान हुए इस समझौते के तहत गोपालपुर-टाटा विशेष आर्थिक क्षेत्र में 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से 0.4 एमटीपीए क्षमता का ग्रीन अमोनिया संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके साथ 1 हजार करोड़ रुपये की लागत से जेटी-लेस फ्लोटिंग टर्मिनल का भी निर्माण होगा। इस परियोजना से लगभग 3,400 लोगों को रोजगार मिलेगा।

इसके अलावा पारादीप में 34 हजार करोड़ रुपये के निवेश से 0.8 एमटीपीए क्षमता का ग्रीन अमोनिया संयंत्र स्थापित किया जाएगा, जिससे करीब 3,600 रोजगार सृजित होंगे। वहीं 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से ग्रीन मेथनॉल परियोजना भी विकसित की जाएगी।

मुख्यमंत्री बोले- औद्योगिक विकास में मील का पत्थर

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उद्योग एवं कौशल विकास मंत्री संपद चंद्र स्वाईं, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, विश्व बैंक समूह, जापान दूतावास तथा कई प्रमुख जापानी कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि जापान भारत का भरोसेमंद विकास और निवेश साझेदार रहा है। यह समझौता ओडिशा के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा और ‘समृद्ध ओडिशा-2036’ तथा ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा।

उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाईं ने कहा कि निवेश-अनुकूल नीतियों, मजबूत आधारभूत संरचना और पारदर्शी प्रशासन के कारण ओडिशा वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बन चुका है। राज्य सरकार सभी परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए हरसंभव सहयोग देगी।

आईएचआई कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष हिरोशी इदे ने ओडिशा की रणनीतिक स्थिति और औद्योगिक आधार की सराहना की, जबकि एसीएमई ग्रुप के संस्थापक एवं अध्यक्ष मनोज उपाध्याय ने कहा कि यह साझेदारी भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा देगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से हरित हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया, एयरोस्पेस, शिपबिल्डिंग, लॉजिस्टिक्स, इस्पात और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भविष्य के निवेश का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

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